Friday, 8 May 2026

जाता हुआ साल

 


जाता हुआ साल

किसी पुराने कैलेंडर की तरह

दीवार से उतर रहा है

और कीलों पर

हमारी उम्मीदें टँगी रह जाती हैं।


 नया वर्ष

आ गया है पर तुम मेंरे

गए नहीं 

पर मिट्टी अब भी

बीजों की नींद सँभाले हुए है

कुछ प्रश्न

उत्तर बनने से पहले

आदत बन गए—

जैसे शाम की थकान,

जिसे हम

नाम नहीं देते।

धीरे से आदतें बदलीं—

यही उसका सबसे

गहरा हस्तक्षेप था।


Dr Manish Kumar Mishra 


No comments:

Post a Comment

Share Your Views on this..

श्रीमद्भगवद्गीता का मनोविज्ञान विषाद, आत्म-नियमन, निष्काम कर्म, समत्व और मनोवैज्ञानिक कल्याण का समकालीन अध्ययन डॉ. मनीष कुमार सी. मिश्रा

  भारतीय मनोविज्ञान एवं जीवन-दर्शन श्रीमद्भगवद्गीता का मनोविज्ञान विषाद, आत्म-नियमन, निष्काम कर्म, समत्व और मनोवैज्ञानिक कल्याण का समकालीन अ...

Popular Posts