Wednesday, 15 July 2026

साहित्यिक कृतियों पर आधारित हिन्दी फ़िल्में

 साहित्यिक कृतियों पर आधारित हिन्दी फ़िल्में : परंपरा, विकास और सांस्कृतिक महत्त्व

भारतीय सिनेमा और साहित्य का संबंध अत्यंत घनिष्ठ रहा है। हिन्दी सिनेमा के विकास के साथ-साथ साहित्यकारों की कहानियों, उपन्यासों, नाटकों और संस्मरणों ने फ़िल्मों को सशक्त कथानक, गहन चरित्र और सामाजिक संवेदना प्रदान की।


साहित्य और सिनेमा का अंतर्संबंध :

साहित्य मानव जीवन के अनुभवों का शब्दबद्ध रूप है जबकि सिनेमा उनका दृश्य-श्रव्य रूपांतरण है।

प्रमुख साहित्यकार एवं कृतियाँ :

प्रेमचन्द (गोदान, गबन, शतरंज के खिलाड़ी, सद्गति), फणीश्वरनाथ रेणु (तीसरी कसम, पंचलैट), भीष्म साहनी (तमस), अमृता प्रीतम (पिंजर), विजयदान देथा (दुविधा/पहेली), मन्नू भंडारी (रजनीगंधा), राजेन्द्र यादव (सारा आकाश), मोहन राकेश (आषाढ़ का एक दिन, उसकी रोटी), उदय प्रकाश (मोहनदास), महाश्वेता देवी (हज़ार चौरासी की माँ), रवीन्द्रनाथ ठाकुर (काबुलीवाला, नौकाडूबी), बंकिमचन्द्र (आनंदमठ), शरतचन्द्र (देवदास, परिणीता, बिराज बहू), भगवतीचरण वर्मा (चित्रलेखा), गुलशन नंदा (काजल, नीलकमल, पत्थर के सनम, खिलौना, दाग, आराधना, अमर प्रेम, शर्मीली, झील के उस पार, प्रेम कहानी)।

विश्व साहित्य से प्रेरित फ़िल्में

Wuthering Heights से दिल दिया दर्द लिया, Tess of the d'Urbervilles से दुल्हन एक रात की, It Happened One Night से चोरी-चोरी, सुहाना सफर और दिल है कि मानता नहीं।

समानांतर सिनेमा

भूमिका, माया दर्पण, 27 डाउन, उसकी रोटी, आंधी, किनारा, मौसम, घर, कोशिश, लिबास, माचिस, पार, मोहनदास आदि।

उपसंहार

साहित्यिक कृतियों पर आधारित फ़िल्मों ने भारतीय समाज, संस्कृति और इतिहास को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाया तथा साहित्य के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाई।

डॉ मनीष कुमार मिश्रा 

2024 के प्रमुख हिन्दी उपन्यास

 


1.ग्रेट कंचना सर्कस - विश्वास पाटिल  (अनुवाद रवि बुले)- 2024

2.क़िस्साग्राम - प्रभात रंजन-2024

3.रंग पुटुसिया - अमरेश द्विवेदी -2024

4.फिरंगी राजा - राजगोपाल सिंह वर्मा-2024

5.मुंबई नाइट्स - संजीव पालीवाल- 2024

6.अल्लाह मियां का कारखाना - मोहसिन खान - 2023

7.गांधी और सरलादेवी चौधरानी: बारह अध्याय - अलका सरावगी- 2023

8.आश्वित्ज एक प्रेम कथा - गरिमा श्रीवास्तव - 2023

9. तृण धरि ओट- अनामिका -2023

डॉ मनीष कुमार मिश्रा को प्राप्त पुरस्कार

1. महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2020-21के लिए संत नामदेव पुरस्कार (काव्य हेतु स्वर्ण)

2. भारतीय राजदूतावास ताशकंद उज़्बेकिस्तान द्वारा वर्ष 2025 के लिए "अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सेवी सम्मान"

3. पल्लव काव्य मंच, रामपुर द्वारा वर्ष 2020 में डॉ लक्ष्मी नारायण लाल राष्ट्रीय सम्मान ।

4. महात्मा गांधी राजभाषा हिन्दी प्रचार संस्था, पुणे द्वारा वर्ष 2021 में अखिल भारतीय राजभाषा हिन्दी सेवी सम्मान पुरस्कार

भारतीय ज्ञान परंपरा

  भारतीय ज्ञान परंपरा: सामान्य परिचय 

1.1 भारतीय ज्ञान परंपरा: अर्थ,परिभाषा और स्वरूप 

1.2 भारतीय ज्ञान प्रणाली दृष्टिकोण 

1.3 भारतीय ज्ञान परंपरा: प्राचीन और आधुनिक भारत में 

 भारतीय ज्ञान परंपरा: प्रमुख विद्वान 

2.1 दर्शन और साहित्य ( महर्षि व्यास,पाणिनी, नागार्जुन, बाणभट्ट)

2.2 योग और चिकित्सा ( चरक, सुश्रुत, महर्षि पतंजलि)

2.3  गणित और खगोलीय विज्ञान ( आर्यभट्ट, बोधायन , भास्कराचार्य )

भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख ग्रंथ 

3.1 वेद और उपवेद

3.2 पुराण और उपनिषद 

3.3 वेदांत, न्याय शास्त्र,सांख्य और मीमांसा दर्शन

4.भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक प्रदेय 

4.1 रामायण, महाभारत ,गीता और नाट्यशास्त्र 

4.2 योग, गणित, खगोल और चिकित्सा 

4.3  प्रकृति और जैव संसाधन : संरक्षण और प्रबंधन


ताशकंद: कविता संग्रह

 


डॉ उषा आलोक दुबे जी के व्याख्यान




 

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Saturday, 11 July 2026

सब दोस्त यार दिलवाले रखना / ग़ज़ल/ डॉ मनीष कुमार मिश्रा








 

















सब दोस्त यार दिलवाले रखना

सुख-दुःख उन्हें संभाले रखना।


जीवन का क्या, पल दो पल है

उसकी यादों के उजाले रखना।


आएगी एक दिन सच है लेकिन 

तू हँस कर मौत को टाले रखना।


जाने कब वो मिल जाए ख़ज़ाना 

तुम इश्क़- ए- जुनून पाले रखना ।


जिनसे खुलकर बात कर सको 

ऐसे यार दोस्त हम प्याले रखना ।


डॉ मनीष कुमार मिश्रा 

के एम अग्रवाल महाविद्यालय 

कल्याण पश्चिम महाराष्ट्र ।



Monday, 6 July 2026

जाने क्यों तुझे मैंने फिर पुकारा नहीं

 जाने क्यों तुझे मैंने फिर पुकारा नहीं,

मुश्किल ये कि तेरे बिन गुज़ारा नहीं।


सफ़र लंबा है अभी बड़ी दूर जाना है 

अब किसे आवाज़ दूँ कोई सहारा नहीं।


वो अब किसी और का हुआ तो क्या हुआ 

मैं इश्क़ की बाज़ी अभी तक हारा नहीं।


डॉ मनीष कुमार मिश्रा 

के एम अग्रवाल महाविद्यालय 

 कल्याण पश्चिम 


Sunday, 21 June 2026

मिट्टी पानी और पेड़


 

एक ही मौसम हरदम नहीं रहता

 एक ही मौसम हरदम नहीं रहता

हमदम हमेशा हमदम नहीं रहता।


उस शहर से अब कोई वास्ता नहीं 

वहां अब मेरा वो सनम नहीं रहता। 


मेरी मां जब भी थाली परोसती थी

खाने को कभी कुछ कम नहीं रहता।

                 

डॉ मनीष कुमार मिश्रा 





अहमद फ़राज़ के बेस्ट 20 शेर

 अहमद फ़राज़ के बेस्ट 20 शेर 1.ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें 2.कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब...