एक ही मौसम हरदम नहीं रहता
हमदम हमेशा हमदम नहीं रहता।
उस शहर से अब कोई वास्ता नहीं
वहां अब मेरा वो सनम नहीं रहता।
मेरी मां जब भी थाली परोसती थी
खाने को कभी कुछ कम नहीं रहता।
डॉ मनीष कुमार मिश्रा
एक ही मौसम हरदम नहीं रहता
हमदम हमेशा हमदम नहीं रहता।
उस शहर से अब कोई वास्ता नहीं
वहां अब मेरा वो सनम नहीं रहता।
मेरी मां जब भी थाली परोसती थी
खाने को कभी कुछ कम नहीं रहता।
डॉ मनीष कुमार मिश्रा
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