Sunday, 21 June 2026

मिट्टी पानी और पेड़


 

एक ही मौसम हरदम नहीं रहता

 एक ही मौसम हरदम नहीं रहता

हमदम हमेशा हमदम नहीं रहता।


उस शहर से अब कोई वास्ता नहीं 

वहां अब मेरा वो सनम नहीं रहता। 


मेरी मां जब भी थाली परोसती थी

खाने को कभी कुछ कम नहीं रहता।

                 

डॉ मनीष कुमार मिश्रा 





सब दोस्त यार दिलवाले रखना / ग़ज़ल/ डॉ मनीष कुमार मिश्रा

  सब दोस्त यार दिलवाले रखना सुख-दुःख उन्हें संभाले रखना। जीवन का क्या, पल दो पल है उसकी यादों के उजाले रखना। आएगी एक दिन सच है लेकिन  तू हँस...