काश !!! एक शाम अकेले जाने-पहचाने रास्तों पर अनजानी सी मंजिल क़ि तरफ बस समय काटने के लिए बढ़ते हुवे देखता हूँ एक वैसी ही लड़की जैसी लड़की को मै कभी प्यार किया करता था . उसे पल भर का देखना उन सब लम्हों को देखने जैसा था जो मेरे अंदर तब से बसते हैं जब से उस लड़की से मुलाकात हुई थी जिसे मैं प्यार करता था उस एक पल में जी गया अपना सबसे खूबसूरत अतीत और शायद भविष्य भी . वर्तमान ...
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।