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संदेश

एक वैसी ही लड़की

काश !!!      एक शाम अकेले जाने-पहचाने रास्तों पर       अनजानी सी  मंजिल क़ि तरफ       बस समय काटने के लिए बढ़ते हुवे       देखता हूँ      एक वैसी ही लड़की      जैसी लड़की को मै कभी प्यार किया करता था .      उसे पल भर का देखना      उन सब लम्हों को देखने जैसा था     जो मेरे       अंदर    तब   से   बसते   हैं      जब   से   उस  लड़की  से   मुलाकात   हुई   थी     जिसे   मैं   प्यार  करता था    उस  एक  पल   में    जी   गया   अपना   सबसे   खूबसूरत   अतीत     और   शायद   भविष्य   भी  .    वर्तमान ...

ECONOMICAL & CULTURAL RELATIONS OF INDIA IN GLOBAL PERSPECTIVE

IF YOU ARE INTERESTED TO  PRESENT  YOUR RESEARCH PAPER IN INTERNATIONAL SEMINAR ON   ''  ECONOMICAL & CULTURAL RELATIONS OF INDIA IN GLOBAL PERSPECTIVE''  THEN  COMMENT ON THE SAME POST .      

international seminar 2011-2012

in december 2011 we are going to organize a TWO DAYS INTERDISCIPLINARY INTERNATIONAL SEMINAR ON  '' ECONOMICAL & CULTURAL RELATIONS OF INDIA IN GLOBAL PERSPECTIVE '' it will be a UGC SPONSORED SEMINAR.         FOR ANY DETAIL COMMENT ON THE SAME POST          

तुझे इसतरह बनाते और सवारते हुवे

यूं ही तुम्हे सोचते हुवे   सोचता  हूँ क़ि चंद लकीरों से तेरा चेहरा बना दूं    फिर उस चेहरे में , खूबसूरती  के सारे रंग भर दूं .  तुझे इसतरह बनाते और सवारते हुवे, शायद  खुद को बिखरने से रोक पाऊंगा .   पर जब भी कोशिश की,  हर बार नाकाम रहा .   कोई भी रंग,  कोई भी तस्वीर,  तेरे मुकाबले में टिक ही नहीं पाते . तुझसा ,हू-ब-हू तुझ सा ,  तो बस तू है या  फिर   तेरा अक्स है जो मेरी आँखों में बसा है .   वो अक्स जिसमे   प्यार के रंग हैं   रिश्तों की रंगोली है   कुछ जागते -बुझते सपने हैं  दबी हुई सी कुछ बेचैनी है   और इन सब के साथ ,  थोड़ी हवस भी है .  इन आँखों में ही   तू है  तेरा ख़्वाब है   तेरी उम्मीद है   तेरा जिस्म है  और हैं वो ख्वाहीशें , जो  तेरे बाद   तेरी अमानत के तौर पे  मेरे पास ही रह गयी हैं . मैं जानता हूँ की मेरी ख्वाहिशें ,  अब किसी और की जिन्दगी है.   इस कार...

टूट कर सवरने की आदत सी हो गयी है

टूट कर सवरने की फितरत  हो गयी है ,  न जाने क्यों ,मुझे मोहब्बत हो गयी है . जानता हूँ ,अब तुम किसी और की हो, पर क्या करूँ,  तुम्हारी आदत हो गयी है   तुम्हे भुला देने के  ख़याल  भर  से, अजीब  सी बड़ी, मेरी  हालत  हो गयी  है .      

मेरे लिए एक समाचार था

कल महीनो बाद , वही फोन आया जिसका इन्तजार था  कुछ गिले- शिकवों के बाद, मेरे लिए एक समाचार था .  वो अब, जब, हो गए हैं  किसी और के तो,बताना नहीं भूले  कि मैं उनका एक दोस्त रहा, जो मोहब्बत में वफादार था.           

शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन आयोजित

शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन आयोजित पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, शिलांग के संयुक्त तत्वावधान में तान दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का आयोजन गाड़ीखाना स्थित श्री राजस्थान विश्रामभवन में दिनांक 3 जून से 5 जून 2011 तक किया गया। श्री बिमल बजाज की अध्यक्षता में 3 जून को दोपहर 3 बजे मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास राज्य मंत्रि, भारत सरकार कुमारी अगाथा संगमा ने इस सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर    किया। विशेष अतिथि के रूप में श्री अतुल कुमार माथुर, अतिरिक्त आरक्षी महानिदेशक, मेघालय राज्य, अतिथि के रूप में श्री एन. मुनिश सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, श्रीमती उर्मि कृष्ण, निदेशक कहानी लेखन महाविद्यालय, अंबाला छावनी, समाज सेवक श्री ओम प्रकाश अग्रवाल उपस्थित थे। इस सत्र में सुस्मिता दास, श्री विश्वजीत सरकार, संचयिता राय, अर्पिता चौधुरी और साथियों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। सरला मिश्र ने मुख्य अतिथि का परिचय तथा डॉ.   अरुणा कुमारी उपाध्याय ने समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत की। पूर्वोत्तर वार...