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टिटिहरी की काँद

 1. टिटिहरी की काँद बाँसों में मरमराती  हवा के साथ टिटिहरी की काँद कानों में पड़ रही थी उस गहराती हुई रात में हवा  पानी को हिलोरती रही  मन - मिट्टी को  भिगोती रही । सुबह अनमनी सी  धूप तो निकली  पर खिली नहीं  बल्कि बादलों से संवरा गई  उसका श्यामल सौंदर्य आलस का अनुष्ठान रचे था । उछार के बाद अघायी धरा का प्रीतिस्निग्ध चटक रंग सतरंगी था  शकुंतिका मुंडेर पर थी  मोर मंदिर के कलश पर  और मन दूर किसी प्याजी रंग की आंखों में कैद ।        डॉ मनीष कुमार मिश्रा ।

हिन्दी : पक्ष – प्रतिपक्ष

  हिन्दी : पक्ष – प्रतिपक्ष डॉ. मनीष कुमार मिश्रा सहायक प्राध्यापक , हिन्दी विभाग के.एम.अग्रवाल महाविद्यालय कल्याण – पश्चिम , महाराष्ट्र manishmuntazir@gmail.com 8090100900 / 9082556682             हिं दी के पक्ष में जिस भावुकता के साथ तर्क रखे जाते हैं उन्होंने हिंदी का कोई भला नहीं किया अपितु नुकसान ही अधिक हुआ । हिंदी की पक्षधरता में ही व्यापक दोष रहा है । आजादी के बाद भाषाई आधार पर राज्यों के निर्धारण के बाद भी अगर कोई देशज / क्षेत्रीय भाषाओं के वर्चस्व को नहीं समझ पा रहा है तो निश्चित ही यह विचार उसे निष्पक्षता से आकलन नहीं करने देगा । इस देश की संरचना ही बहुवचनात्मक है । इस संरचना के बीच अगर किसी एक भाषा को व्यापक स्तर पर स्वीकार्यता दिलानी है तो वह इन तमाम भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय और आदान - प्रदान की व्यापक श्रृंखला के माध्यम से ही हो सकता है । क्योंकि जिस भाषा को भी आप "राष्ट्र भाषा" का ताज देना चाहते हैं , उस भाषा का प्राण तत्व इन्हीं भारतीय भाषाओं में निहित होना चाहिए । अगर ऐसा नहीं हुआ तो विरोध , सं...

स्वराज्य का सपना और प्रेमचंद ।

              स्वराज्य का सपना और प्रेमचंद ।                                                        डॉ. मनीष कुमार मिश्रा सहायक प्राध्यापक – हिन्दी विभाग के. एम. अग्रवाल महाविद्यालय कल्याण (पश्चिम) , महाराष्ट्र manishmuntazir@gmail.com                   हिन्दी पट्टी के लोगों के लिए सचमुच यह गर्व का विषय है कि उनके पास प्रेमचंद जैसा कद्दावर कथाकार “है” । एक ऐसा कथाकार जिसने भारतीय साहित्य की अग्रिम पंक्ति में अपना स्थान बनाया । प्रेमचंद ने जो लिखा वो लोगों को अपना सा लगा । हिन्दी पट्टी को साहित्य के मंच से समाज सुधार के लिए वैचारिक स्तर पर आंदोलित करने वाले प्रेमचंद प्रमुख और अगुआ लेखक हैं । ...