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अमरकांत : जन्म शताब्दी वर्ष

          अमरकांत : जन्म शताब्दी वर्ष डॉ. मनीष कुमार मिश्रा प्रभारी – हिन्दी विभाग के एम अग्रवाल कॉलेज , कल्याण पश्चिम महाराष्ट्र                   उत्तर प्रदेश के सबसे पूर्वी जिले बलिया में एक तहसील है - ‘रसड़ा’। इस रसड़ा तहसील के सुपरिचित गाँव ‘नगरा’ से सटा हुआ एक छोटा सा गाँव और है। यह गाँव है - ‘भगमलपुर’। देखने में यह गाँव नगरा गाँव का टोला लगता है।भगमलपुर गाँव तीन टोलों में बँटा है। उत्तर दिशा की तरफ का टोला यादवों (अहीरों) का टोला है तो दक्षिण में दलितों का टोला (चमरटोली)। इन दोनों टोलों के ठीक बीच में कायस्थों के तीन परिवार थे। ये तीनों घर एक ही कायस्थ पूर्वज से संबद्ध , कालांतर में तीन टुकड़ों में विभक्त होकर वहीं रह रहे थे।             इन्हीं कायस्थ परिवारों में से एक परिवार था सीताराम वर्मा व अनन्ती देवी का। इन्हीं के पुत्र के रूप में 1 जुलाई 1925 को अमरकांत का जन्म हुआ। अमरकांत का नाम श्रीराम रखा गया। इनक...

उज़्बेकी कहानी पिस्तावाला का हिन्दी अनुवाद

 

तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥

ChatGPT said: "तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥" —  ईशावास्योपनिषद् , मन्त्र 1 का अंतिम खण्ड मूल श्लोक: Copy code ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥ अनुवाद: यह सम्पूर्ण जगत्, जो कुछ भी इस चलायमान संसार में है, ईश्वर से आवेष्ठित है। इसलिए,  त्यागभावना से  उसका उपभोग करो;  किसी के धन की लालसा मत करो , वह किसका है? पद-by-पद व्याख्या: तेन  — उस (ईश्वर) के द्वारा त्यक्तेन  — त्याग करके, त्याग की भावना से भुञ्जीथाः  — उपभोग करो, उपयोग में लो मा  — मत गृधः  — लोभ करो कस्यस्वित्  — किसका (है?) धनम्  — धन भावार्थ: यह मंत्र अत्यंत गहन और अद्वितीय आध्यात्मिक तथा सामाजिक संदेश देता है। इसमें कहा गया है कि यह पूरा संसार ईश्वर की सम्पत्ति है। हमें इस संसार में जो कुछ भी मिला है — भोजन, वस्त्र, धन, प्रकृति — वह सब ईश्वर से प्राप्त है और सभी के लिए है। इसलिए: हमें  त्याग और संतोष  के साथ जीना चाहिए, भोग करते हुए भी  ममत्व  और  स्वार्थ  का त्याग करना चा...

दुष्यंत कुमार की दस प्रसिद्ध ग़ज़लें

दुष्यंत कुमार की 10 ग़ज़लें 1. मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ  वो ग़ज़ल आप को सुनाता हूँ  एक जंगल है तेरी आँखों में  मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ  तू किसी रेल सी गुज़रती है  मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ  हर तरफ़ एतराज़ होता है  मैं अगर रौशनी में आता हूँ  एक बाज़ू उखड़ गया जब से  और ज़्यादा वज़न उठाता हूँ  मैं तुझे भूलने की कोशिश में  आज कितने क़रीब पाता हूँ  कौन ये फ़ासला निभाएगा  मैं फ़रिश्ता हूँ सच बताता हूँ  - दुष्यंत कुमार       2. ये ज़बाँ हम से सी नहीं जाती  ज़िंदगी है कि जी नहीं जाती  इन फ़सीलों में वो दराड़ें हैं  जिन में बस कर नमी नहीं जाती  देखिए उस तरफ़ उजाला है  जिस तरफ़ रौशनी नहीं जाती  शाम कुछ पेड़ गिर गए वर्ना  बाम तक चाँदनी नहीं जाती  एक आदत सी बन गई है तू  और आदत कभी नहीं जाती  मय-कशो मय ज़रूरी है लेकिन  इतनी कड़वी कि पी नहीं जाती  मुझ को ईसा बना दिया तुम ने  अब शिकायत भी की नहीं जाती  - दुष्यंत कुमार 3. वो आदमी नहीं है मु...

What should be included in traning programs of Abroad Hindi Teachers

  Cultural sensitivity and intercultural communication Syllabus design (Beginner, Intermediate, Advanced) Integrating grammar, vocabulary, and culture Use of role-play, storytelling, games Interactive and communicative teaching techniques Teaching Hindi through songs, films, and media Oral, written, and listening comprehension assessments Using PowerPoint, Google Classroom, Kahoot, Quizlet, etc. Incorporating YouTube, podcasts, Blogging and online resources Building your own digital material library Teaching Indian festivals, customs, and traditions Sensitizing learners to Indian society through language Adapting content for multicultural classrooms Handling diverse classrooms Dealing with language barriers, classroom discipline Motivating students in low-Hindi-exposure environments Peer feedback and trainer evaluation Case studies of real experiences from teachers abroad Basic local language phrases (to help in host country) Emergency preparedness (cultural missteps, com...