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Collected Poems of “October Us Sal.”: An Overview

Collected Poems of “October Us Sal.”: An Overview “The Secret of a poem, no less than a jests prosperity, lies in the ear of him that hears it. Yield to its spell, accept the poets’ mood: This after all is what the sages’ answers. When you ask them of its value. Eve the poet himself in his other mood, tell you that his art is but sleight of hand, his food enchanter’s food, and offer to show you the trick of it- believe him not. Wait for his prophetic hour then give yourself to his passion, his joy or pain.”  (P.01, The Raven) Poetry is also a means for expressing emotions. It is a form of literature where aesthetic and rhythmic language is used to provide a certain emotions of humans. Poems not only deal with human emotions but also deal with current social issues of that particular time. It also deals with different object of the universe. As Deeb Says, “Poetry is a white magic.” (P.16, What is Poetry?) Poetry is a white magic – a magic can convert humans from one imaginatio...

Sports Conference 2020

Dear All, K.M.Agrawal College, Kalyan west, Maharashtra in association with Sports Stars Foundation, S.E.W.A. Kalyan & Taekwondo Education University of India is organizing Two Day International conference cum Open Taekwondo Championship on 25th-26th January 2020.  One can submit his research paper on following topics : 1. Importance of Indoor Sports in our life. 2. Role of Educational Institutions in promoting Sports. 3. Role of Sports in Health and Culture of Society. 4. Comparative study of  indigenous & Foreign Sports. 5. Sports & Technology 6. Effect of Sports on Thoughts & ways of human life. 7. Promotion of Sports by NGO and Sports Bodies in our Country. 8. Role of Government to promote sports in the country for achieving excellence in Sports at International level. Paper is acceptable in Hindi and English Language. Paper must be submitted in Times Roman /Font size 12 on kmagrawalsports@gmail.com before 23-01-2020. Registration fees ...

कवि मनीष : हिंदी कविता के कैनवास का नया रंगरेज़ ।

                        डॉ. गजेन्द्र भारद्वाज हिंदी सहायक प्राचार्य                   काव्य संग्रह ‘अक्टूबर उस साल’ साल 2019 में प्रकाशित मनीष मिश्रा जी के कृतित्व का वह इतिहास है जो उनके उत्तरोत्तर मँझते हुए लेखन और उनकी कविताओं के भाव गांभीर्य की विकास यात्रा को न केवल संकलित कविताओं के शीर्षक अपितु उनकी भाव संपदा की तन्मयता की गाथा सुनाता है। आज अभिव्यक्ति के विभिन्न माध्यमों से जो भी कविताएँ पढ़ने को मिलती हैं उनमें से अधिकां श को पढ़कर ऐसा लगता है मानो उन्हें एक ढाँचा निर्मित करके सायास लिखा गया है ऐसी कविताओं के लेखन के बीच से ऐसी कविता जो अनायास बन जाए इस संग्रह में दिखाई दी हैं जिन्हें पढ़कर यह लगता है कि आज भी कविता शब्दों और भावनाओं के परे जाकर हमारी चैतन्यता से जुड़ी है। मनीष इस संग्रह और इसमें संकलित कविताओं के प्रस्तुतिकरण के लिए बधाई के पात्र हैं जिनका प्रयास इतने कम समय में भी ...

मनीष : भावों व अनुभूति की शाश्वतता के कवि ।

मनीष : भावों व अनुभूति की शाश्वतता के कवि । वर्तमान कविता जटिल जगत की यथार्थता तथा मानव की अनुभूतिजन्य आवश्यकता के मध्य संघर्ष कर रही है। त्रासदीपूर्ण विडंबना के दौर में अपने जीवन और साहित्य को लहूलुहान कर रहा है। ऐसे में कुछ कविताएं मूल्यों की रक्षा के लिए संजीवनली दे रही है तथा संबंधों को सहज बनाने का प्रयास कर रही है। वर्तमान युग के भाव बोध को समझने और रंजीत करने की क्षमता जिन कवियों में नजर आती है उनमें से एक युवा कवि मनीष हैं। युवा कवि मनीष की दोनों रचनाओं में स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिलता तथा उसके उलझे सूत्रों को स्पर्श किया गया है। प्रेम और आकर्षण के कार्यव्यापार में उद्दीपन व प्रतिकर्षण के पहलू प्रकाशित होते हैं। ‘तुम्हारे ही पास’, ‘तृषिता’, ‘कही अनकही’, ‘चांदनी पीते हुए’, ‘गांठा की गठरी’,‘बचना चाहता हूँ’ इत्यादि में प्रेम के प्रति जैविक व सामाजिक अंतर को उद्दात्ततापूर्वक परोसा गया है। संबंधों के प्रति ‘दूरी की छटपटाहट’ तथा ‘निकटता के अनछुएपन’ को आत्मीयतापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। ‘मैं नहीं चाहता था’ में प्रेम के कलंकित विजय व गौरवपूर्ण पराजय को व्यंजित किया गया ह...

मनीष : अस्तित्व की क्षणिकता व जीवन की नश्वरता में भावों व अनुभूति की शाश्वतता के कवि

वर्तमान कविता जटिल जगत की यथार्थता तथा मानव की अनुभूतिजन्य आवश्यकता के मध्य संघर्ष कर रही है। त्रासदीपूर्ण विडंबना के दौर में अपने जीवन और साहित्य को लहूलुहान कर रहा है। ऐसे में कुछ कविताएं मूल्यों की रक्षा के लिए संजीवनली दे रही है तथा संबंधों को सहज बनाने का प्रयास कर रही है। वर्तमान युग के भाव बोध को समझने और रंजीत करने की क्षमता जिन कवियों में नजर आती है उनमें से एक युवा कवि मनीष हैं। हाल ही में उनकी दो रचनाएं ‘इस बार तेरे शहर में (2018)’ और ‘अक्टूबर उस साल (2019)’ प्रकाशित हुई हैं। दोनों रचना संग्रह भाव प्रवणता, विषय वैविध्य तथा प्रस्तुति योजना और शब्द शक्ति की दृष्टि से प्रशंसनीय हैं। इनमें जटिल यथार्थ को समेटने की शक्ति भी दिखाई पड़ती है। ‘कविताओं के शब्द’ कविता में कविता की भाषा के संवर्धन के महत्त्व व कवि की इस संदर्भ में दृष्टि स्पष्ट है। कवि काव्य की भाषा की उपयोगिता तथा संवेदनशीलता से भलीभांति परिचित है। स्त्री-पुरुष के यांत्रिक समानता के स्थान पर यथोचित समता व व्यक्तिनिष्ठता को महत्त्व दे कर स्त्रीत्व को पढ़ा गया है। ‘दुबली-पतली और उजली-सी लड़की’ ‘उसका मन’ ‘उसके संकल्पों का ...