सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकल की प्रेम कहानी
सुभाष चंद्र बोस और एमिली शेंकल की प्रेमकथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक अनोखी और अपेक्षाकृत कम चर्चित कहानी है। यह संबंध लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से लगभग छिपा रहा और इसके बारे में उपलब्ध जानकारी का बड़ा हिस्सा बाद के संस्मरणों और पारिवारिक स्रोतों से मिलता है।
पहली मुलाकात
1930 के दशक की शुरुआत में सुभाष चंद्र बोस यूरोप में थे। उस समय वे स्वास्थ्य-संबंधी कारणों और राजनीतिक गतिविधियों के सिलसिले में यूरोप में रह रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात ऑस्ट्रिया की युवती एमिली शेंकल से हुई।
एमिली ने बोस के साथ उनके लेखन और पत्र-व्यवहार से जुड़े काम में सहायता की। बोस उस समय अपनी पुस्तक The Indian Struggle पर काम कर रहे थे। धीरे-धीरे पेशेवर परिचय व्यक्तिगत निकटता में बदल गया।
प्रेम और दूरी
बोस का जीवन सामान्य पारिवारिक जीवन से बिल्कुल अलग था। उनका अधिकांश समय भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष, राजनीतिक यात्राओं और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध गतिविधियों में बीत रहा था।
दूसरी ओर, एमिली यूरोप में थीं। इसलिए उनका संबंध लगातार दूरी, राजनीतिक परिस्थितियों और अनिश्चित भविष्य से घिरा रहा।
उनके बीच लिखे गए पत्रों से यह संकेत मिलता है कि दोनों के बीच गहरा भावनात्मक संबंध था। बोस उन्हें केवल अपनी सहयोगी के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि उनके प्रति व्यक्तिगत लगाव भी रखते थे।
विवाह—लेकिन बहुत गोपनीय
सुभाष और एमिली के विवाह की सटीक तारीख और परिस्थितियों को लेकर इतिहासकारों में पूर्ण सहमति नहीं है। व्यापक रूप से माना जाता है कि दोनों ने 1942 में विवाह किया, संभवतः यूरोप में एक निजी और गुप्त समारोह में।
बोस ने अपने राजनीतिक जीवन के कारण इस विवाह को सार्वजनिक नहीं किया। उस समय वे भारत की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे थे और उनका पूरा जीवन राजनीतिक संघर्ष के अधीन था।
बेटी अनिता
1942 में ही एमिली और सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनिता बोस का जन्म हुआ। बाद में वह Anita Bose Pfaff के नाम से जानी गईं और जर्मनी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर बनीं।
बोस अपनी बेटी के साथ बहुत कम समय बिता सके। उनकी राजनीतिक और सैन्य गतिविधियाँ उन्हें लगातार यूरोप और एशिया के अलग-अलग हिस्सों में ले जाती रहीं।
अंतिम विदाई?
1943 में बोस जर्मनी से जापान-नियंत्रित एशिया की ओर चले गए। इसके बाद उनका जीवन और भी अधिक संघर्षपूर्ण हो गया। एमिली यूरोप में रह गईं।
1945 में बोस की कथित विमान दुर्घटना में मृत्यु की खबर सामने आई। हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर लंबे समय तक विवाद और विभिन्न दावे होते रहे, लेकिन मुख्यधारा के ऐतिहासिक अभिलेखों में 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू (अब ताइपेई) में विमान दुर्घटना को उनकी मृत्यु का प्रमुख ऐतिहासिक विवरण माना जाता है।
एमिली ने बाद के जीवन में बोस की स्मृति को सार्वजनिक तमाशे में बदलने के बजाय काफी निजी रखा। उन्होंने अपनी बेटी अनिता का पालन-पोषण किया।
इस प्रेमकथा की विशेषता
सुभाष और एमिली की कहानी में प्रेम का सबसे मार्मिक पक्ष यह है कि दोनों का साथ बहुत कम समय का था, जबकि दूरी बहुत लंबी थी।
एक तरफ सुभाष का जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित था और दूसरी तरफ एमिली ने उनके निजी जीवन में ऐसी भूमिका निभाई जिसके बारे में लंबे समय तक बहुत कम सार्वजनिक चर्चा हुई।
इसलिए इसे केवल एक प्रसिद्ध नेता की प्रेमकहानी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। यह प्रेम, राजनीतिक प्रतिबद्धता, युद्ध, निर्वासन और व्यक्तिगत त्याग के बीच संबंध की कहानी भी है।
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Share Your Views on this..