ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र–2026 के महत्त्वपूर्ण बिंदु
12 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 140 बिंदुओं वाला “नई दिल्ली घोषणापत्र–2026” सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके प्रमुख बिंदु हैं:
संयुक्त राष्ट्र में सुधार
संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रभावी तथा प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की मांग की गई। चीन और रूस ने भारत तथा ब्राज़ील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया।ग्लोबल साउथ की भागीदारी
अंतरराष्ट्रीय निर्णय-प्रक्रिया में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों की आवाज़ तथा प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर बल दिया गया।पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा
22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। आतंकवाद के विरुद्ध “शून्य सहिष्णुता” और दोहरे मानदंड समाप्त करने की मांग की गई।सीमापार आतंकवाद पर कार्रवाई
आतंकवादियों की सीमापार आवाजाही, आर्थिक सहायता, सुरक्षित ठिकानों और आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वालों के विरुद्ध कार्रवाई पर सहमति बनी। आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता अथवा जातीय समुदाय से न जोड़ने की बात कही गई। Economic Timesविश्व संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान
युद्ध और अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से करने तथा संघर्षों के मूल कारणों को दूर करने पर बल दिया गया।पश्चिम एशिया में संयम की अपील
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और स्थिति को बिगाड़ने वाले कदमों से बचने को कहा गया। नागरिकों, नागरिक प्रतिष्ठानों तथा शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया।गाज़ा और फिलिस्तीन
गाज़ा में युद्धविराम के पालन, निर्बाध मानवीय सहायता तथा 1967 की सीमाओं पर आधारित स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन के साथ दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया गया।एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों, द्वितीयक प्रतिबंधों और दबावपूर्ण आर्थिक उपायों को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया गया।मनमाने टैरिफ का विरोध
विश्व व्यापार को प्रभावित करने वाले एकतरफा टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाए जाने वाले संरक्षणवादी कार्बन शुल्कों पर चिंता जताई गई।विश्व व्यापार संगठन में सुधार
विश्व व्यापार संगठन की नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन करते हुए उसकी दो-स्तरीय विवाद-निपटान प्रणाली बहाल करने की मांग की गई।IMF और विश्व बैंक में सुधार
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की कोटा हिस्सेदारी, मतदान शक्ति और नेतृत्वकारी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।स्थानीय मुद्राओं में व्यापार
ब्रिक्स देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार, निवेश और भुगतान बढ़ाने तथा सीमा-पार भुगतान प्रणालियों को परस्पर जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन करने पर सहमति हुई।कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सहयोग
सुरक्षित, विश्वसनीय, समावेशी और उत्तरदायी AI व्यवस्था तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन दिया गया।जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा
पेरिस समझौते और “साझा लेकिन अलग-अलग उत्तरदायित्व” के सिद्धांत की पुष्टि की गई। नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, जैव-ऊर्जा, कम-उत्सर्जन हाइड्रोजन और परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के संतुलित मिश्रण को स्वीकार किया गया।समुद्री सुरक्षा
व्यापारिक जहाजों, समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स नाविक नेटवर्क (BRICS Seafarers’ Network) बनाने का प्रस्ताव रखा।
संक्षिप्त महत्त्व
यह घोषणापत्र भारत के लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा, भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संबंधी आकांक्षा का समर्थन, आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता और ग्लोबल साउथ की प्रभावशाली भूमिका को सामूहिक स्वीकृति मिली। साथ ही, ईरान और खाड़ी देशों के परस्पर मतभेदों के बावजूद घोषणापत्र का सर्वसम्मति से पारित होना भारत की कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
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