कुछ बताना तो कुछ छुपाना पड़ता है
रिश्ता तो हर हाल में निभाना पड़ता है।
ये सियासत के खेल बड़े ही अजीब हैं
ख़ुद ही लगाकर आग बुझाना पड़ता है।
वो जो प्यार में चाहता है बेपनाह तुम्हें।
उसे तो हर हाल में मनाना पड़ता है।
कामयाबी ऐसे ही नहीं टिकती है, दोस्त
कभी झुकना तो कभी झुकाना पड़ता है।
जो वक़्त के साथ चलना नहीं सीखते
उन्हें अक्सर बहुत पछताना पड़ता है।
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 2 सितंबर 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
बेहतरी शायरी
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