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Outcome-Based Education (OBE): अवधारणा, विकास एवं आवश्यकता

 

Chapter 1

Outcome-Based Education (OBE): अवधारणा, विकास एवं आवश्यकता

प्रस्तावना

इक्कीसवीं शताब्दी में उच्च शिक्षा का स्वरूप तीव्र गति से परिवर्तित हुआ है। वैश्वीकरण, ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था, डिजिटल क्रांति तथा रोजगारोन्मुख शिक्षा की अपेक्षाओं ने पारंपरिक शिक्षा पद्धति को Outcome-Based Education (OBE) की ओर अग्रसर किया है। OBE में शिक्षा का केंद्र पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थी द्वारा अर्जित अधिगम परिणाम (Learning Outcomes) होते हैं।

1. Outcome-Based Education क्या है?

Outcome-Based Education ऐसी शिक्षण प्रणाली है जिसमें पाठ्यक्रम, शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन सभी को पूर्व निर्धारित Learning Outcomes के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है।

2. OBE की प्रमुख विशेषताएँ

• विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा
• स्पष्ट एवं मापनीय Learning Outcomes
• Competency-based Curriculum
• Bloom’s Taxonomy आधारित शिक्षण
• Continuous Assessment
• Employability एवं Skill Development
• Continuous Quality Improvement (CQI)

3. पारंपरिक शिक्षा एवं OBE

पारंपरिक शिक्षा में पाठ्यक्रम पूर्ण करना मुख्य लक्ष्य होता है, जबकि OBE में विद्यार्थी की वास्तविक क्षमता, ज्ञान, कौशल और व्यवहारिक दक्षता का विकास प्रमुख उद्देश्य होता है।

4. भारत में OBE

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), UGC तथा NAAC ने Outcome-Based Education को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रमुख आधार माना है।

5. OBE और NAAC

NAAC के अनुसार Programme Outcomes (PO), Programme Specific Outcomes (PSO), Course Outcomes (CO), CO–PO Mapping तथा Attainment Report गुणवत्ता मूल्यांकन के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।

6. OBE का उद्देश्य

ऐसे स्नातकों का निर्माण करना जो विषय ज्ञान, आलोचनात्मक चिंतन, संप्रेषण कौशल, अनुसंधान क्षमता, नैतिक मूल्यों तथा रोजगारोन्मुख दक्षताओं से युक्त हों।

अध्याय का सार

Outcome-Based Education आधुनिक उच्च शिक्षा की एक वैज्ञानिक एवं उत्तरदायी प्रणाली है जिसमें शिक्षा की सफलता विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अधिगम परिणामों से मापी जाती है।

“The true measure of education lies not in what teachers teach, but in what learners are able to understand, apply, create and contribute to society.”

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