प्रस्तावना अलीशेर नवोई मध्य एशियाई साहित्यिक परंपरा के उन विरल रचनाकारों में हैं जिन्होंने साहित्य को केवल सौंदर्यात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित न रखकर उसे भाषा, संस्कृति और मानवीय चेतना की प्रतिष्ठा से भी जोड़ा। उनका जन्म 9 फ़रवरी 1441 को हेरात में हुआ। उन्होंने हेरात, मशहद और समरकंद में शिक्षा प्राप्त की तथा अरबी, फ़ारसी, इतिहास, दर्शन, संगीत और काव्यशास्त्र का गहन अध्ययन किया। अब्दुर्रहमान जामी उनके गुरु, मित्र और आध्यात्मिक मार्गदर्शक रहे। वे राजकीय जीवन में भी सक्रिय थे और शिक्षा, संस्कृति तथा जनकल्याण के क्षेत्र में उन्होंने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। नवोई ने चगताई तुर्की में ‘नवोई’ तथा फ़ारसी में ‘फ़ानी’ उपनाम से रचनाएँ लिखीं। उनका विशाल गीतात्मक काव्य-संग्रह ‘ख़ज़ाइन उल-मआनी’ चार दीवानों में विभाजित है। इसके अतिरिक्त ‘ख़म्सा’, ‘लिसान उत-तैर’, ‘महबूब उल-क़ुलूब’, ‘मजालिस उन-नफ़ाइस’, ‘मीज़ान उल-अवज़ान’ और ‘मुहाकमत उल-लुग़तैन’ जैसी कृतियाँ उनकी बहुमुखी प्रतिभा की परिचायक हैं। उन्होंने चगताई तुर्की को उच्च साहित्य की प्रतिष्ठित भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका नि...
हिन्दी साहित्य, भाषा-विज्ञान, समाज-विज्ञान, भारतीय संस्कृति और सिनेमा पर प्रामाणिक शोधपरक आलेख। संपादक: डॉ. मनीष कुमार मिश्रा।